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बीमार चाय श्रमिकों का होगा इलाज

January 14, 2012 Leave a comment

जलपाईगुड़ी: बरसों से बंद डुवार्स के ढेकलापाड़ा चाय बागान में हुई मौत की हालिया घटनाओं के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। जिलाधिकारी स्मारकी महापात्र ने शुक्रवार को बताया कि ढेकलापाड़ा चाय बागान के बीमार श्रमिकों को अस्पताल में भर्ती कराकर उनका इलाज कराया जाएगा। गुरुवार को आत्महत्या की चेतावनी देने वाली सुमित्रा राई को वीरपाड़ा-मदारीहाट थाना की पुलिस ने तलाश की लेकिन उनका सुराग नहीं मिल पाया है। इस बीच यह महिला बंद बागान के श्रमिकों की बदहाली दूर करने में प्रशासनिक नाकामी के खिलाफ आत्महत्या की चेतावनी से पीछे हट गई है। जानकारी अनुसार दार्जिलिंग की शॉल बिक्रेता सुमित्रा राई ने गुरुवार को बताया कि उन्होंने अपनी साम‌र्थ्य अनुसार बेरोजगार एवं भूखमरी के शिकार श्रमिकों की मदद की है। लेकिन उनकी साम‌र्थ्य की भी सीमा है। इसलिए प्रशासन को इन असहाय श्रमिकों की मदद को सामने आना चाहिए। जानकारी अनुसार सुमित्रा राई ने दिसंबर में सात बोरी चावल, दो बोरी दाल और उसके बाद चार बोरी चावल और दो बोरी दाल श्रमिकों को दी थी। इसके बाद सुमित्रा ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि जिला प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो वे आत्महत्या कर लेंगी। वहीं, जिलाधिकारी ने ढेकलापाड़ा चाय बागान में भुखमरी एवं कुपोषण के चलते होने वाली मौत की घटनाओं से इंकार किया है। उधर, उत्तर बंगाल उन्नयन मंत्री गौतम देव ने बताया कि ढेकलापाड़ा चाय बागान को खुलवाने की कोशिश जारी है। जिलाधिकारी स्मारकी महापात्र ने कहा कि सरकारी एम्बुलेंस से बीमार श्रमिकों को अस्पताल ले जाया जाएगा। इसके अलावा उन्हें अंत्योदय व अन्नपूर्णा योजना के अंतर्गत खाद्यान्न दिलाया जाएगा। मदारीहाट के बीडीओ हीरक मंडल ने शुक्रवार को ढेकलापाड़ा चाय बागान की श्रमिक लाइन का दौरा किया। उन्होंने बेरोजगार श्रमिकों के साथ बात कर उन्हें आश्र्वस्त किया। इस रोज इलाके में जिला प्रशासन से भेजी गई मेडिकल टीम भी पहुंची। महिला को आत्मदाह से रोका : वीरपाड़ा, संवादसूत्र अनुसार: बरसों से बंद पड़े ढेकलापाड़ा चाय बागान को खुलवाने की मांग को लेकर शुक्रवार को एक अनहोनी होते होते बच गई। इस रोज शॉल व्यवसाई और दार्जिलिंग निवासी सुमित्रा राई जो भावनात्मक रूप से ढेकलापाड़ा चाय बागान के बेरोजगार व बीमार श्रमिकों के साथ जुड़ी हुई हैं ने कारखाने के सामने ही आत्मदाह करने जा रही थीं। सुबह 10.50 पर जब वह आत्मदाह करने जा रही थीं उस समय बागान के हजारों श्रमिक वहां उपस्थित थे। तभी वहां श्रमिक पहुंच गए और उन्होंने रोते बिलखते हुए सुमित्रा राई से आत्मदाह का इरादा छोड़ने का अनुरोध किया।साभार-दैनिकजागरण

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