विकास के लिए रुपयों का पहाड़ खड़ा कर देगी सरकार: रमेश
मलकानगिरि. आदिवासियों और गरीबों के रक्षक होने के नक्सलियों के दावे पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने ऐतराज जताया है। ओडिशा के मलकानगिरि और छत्तीसगढ़ के सुकमा के दौरे के बाद मंगलवार को रमेश ने कहा कि असलियत यह है कि हिंसा के बूते नक्सली तरक्की की राह रोक रहे हैं। विकास योजनाओं के लिए पैसे की कमी नहीं होने दी जाएगी।
सरकार रुपए का पहाड़ खड़ा कर देगी। लेकिन काम होना चाहिए। ओडिशा के बाद रमेश सुबह करीब सवा नौ बजे हेलिकॉप्टर से सुकमा पहुंचे। उन्होंने ग्रामीण विकास के कार्यक्रमों को आदिवासी इलाकों में बेहतर ढंग से लागू करने पर जोर दिया।
मनरेगा में नकद मजदूरी भुगतान, सुकमा में ग्रामीण उन्नयन प्रशिक्षण केंद्र खोलने, चेक डेम बनाने, सड़क व पेयजल सुविधाओं समेत कई प्रस्तावों पर अपनी सहमति दी। रमेश ने कहा कि माओवादी अपनी विचारधारा से भटक गए हैं। उनकी वजह से लोगों को बुनियादी अधिकार भी मयस्सर नहीं हो पा रहा है।’ कोई भी मसला बंदूक तान कर हल नहीं हो सकता।
उन्होंने माओवादियों से बंदूक छोड़ चुनावी राजनीति में आने की अपील की। रमेश ने कहा कि प्रशासन भी बहती गंगा में हाथ धोने की तैयारी में रहता है। ओडिशा के ही चांदीपुर से हम प्रक्षेपास्त्र दागने में सफल हो रहे हैं, लेकिन मलकानगिरि जिले में गुरुप्रिया नदी पर एक पुल नहीं बन पा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जहां ठेकेदार काम नहीं कर पा रहे हैं, वहां पंचायत प्रतिनिधि, सरपंच, समिति सदस्यों के द्वारा काम कराने का निर्णय करना होगा।
सुकमा में अधिकारियों से बातचीत करने के बाद रमेश ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में बालिकाओं और शिक्षकों से मुलाकात की। खेल मित्रों और बाल बंधुओं से भी उन्होंने चर्चा की। रमेश ने कोंटा एवं छिंदगढ़ में बाल बंधु कार्यक्रम चलाए जाने की बात कही। इस दौरान उनके साथ कोंटा विधायक कवासी लखमा, बस्तर कमिश्रर दुर्गेश चंद्र मिश्रा, कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन एवं जिपं सीईओ नीरज बंसोड़ मौजूद थे। सरपंचों ने जिले में मलेरिया और उल्टी-दस्त की बीमारी को जानलेवा बताते हुए इसके इलाज की समुचित व्यवस्था करने की भी मांग की।
सरपंचों से पूछा, जंगल सरकार से कैसे निपटा जाए
सुकमा कलेक्टोरेट सभागार में जयराम रमेश ने सरपंच और पंचायत प्रतिनिधियों से विकास कार्यो पर चर्चा की। उन्होंने पूछा कि जंगल सरकार से कैसा निपटा जाए? इस सवाल पर इक्का-दुक्का सरपंच को छोड़ सभी ने चुप्पी साध ली। सरपंचों ने नक्सलवाद बढ़ने की एक बड़ी वजह सलवा जुड़ूम को भी बताया। रमेश ने 30 सरपंचों को एक माह के भीतर विकास कार्यो के अध्ययन के लिए सिक्किम व केरल भेजने की बात कही।

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