डुवार्स-तराई में आविप कराएगी 28 को बंद

बिन्नागुड़ी : 27 दिसम्बर को मंहगाई के विरोध में आविप द्वारा डुवार्स-तराई इलाके में जोरदार जुलूस निकाले जाने की योजना है। इसके अतिरिक्त माल बाजार में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित आदिवासी सम्मेलन के विरोध में 28 को डुवार्स-तराई बंद करने का फैसला लिया गया है। बुधवार को जॉन बारला ने बताया कि नागराकाटा कम्युनिटी हॉल में रीजनल कमेटी की बैठक में सभी ब्लॉक यूनिट के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस बैठक में बढ़ती महंगाई और राज्य सरकार के रवैये के खिलाफ आन्दोलन का निर्णय लिया गया। चाय बागान श्रमिकों पर महंगाई की मार जबर्दस्त है, लिहाजा प्रस्तावित जुलूस के क्षेत्र भी यही होंगे। 28 को आहूत बंद राज्य सरकार द्वारा आयोजित किए जाने वाले आदिवासी सम्मेलन के विरुद्ध है।

 

संथाली भाषा दिवस

चामुर्ची : आदिवासी सोशियों एजुकेशनल एंड कलचरल एसोसिएशन (आसेका) के तत्वाधान में चुनाभट्टी चाय बगान के मैदान में संथाली भाषा दिवस काफी उत्साह के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम के दौरान काफी संख्या मं संथाली महाकवि एवं संथाली भाषा के अविष्कार पंडित रघुनाथ मुर्मू एवं संथाल 6विद्रोह के जनक एवं स्वतंत्रता सेनानी सिद्धू कान्हो के छवि पर दीप प्रज्ज्वलित श्री झबई हेम्ब्रम, दीपक हेम्ब्रम, अमित मरांडी, चुखा मुर्मू, रोबिन मरांडी एवं विरोन मुर्मू ने किया। कार्यक्रम का संचालन असेका के जिला अध्यक्ष धानु मुर्मू ने किया। कार्यक्रम में संथाली संस्कृति के विषय वस्तु को नाच-गान के माध्यम से दर्शाया गया। कार्यक्रम में संथाली युवक-युवतियां शाम तक ढो़ल-नगाड़े व मादल के धुन के साथ झूमते रहे। आसेका के जिलाध्यक्ष धानु मूर्मू ने बताया कि संथाली भाषा को गत 22 दिसम्बर 2003 को संविधान के आठवीं अनुसूची में मान्यता प्राप्त है। यह भाषा दिवस आज डुवार्स के सभी इलाके में धूमधाम पंडित रघुनाथ मूर्मु एवं संथाली समाज को एक पहचान दिया।

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Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

1 thought on “डुवार्स-तराई में आविप कराएगी 28 को बंद”

  1. So, the parishad has decided to taste the bandh and Julus etc in the land of Adivasi. The election is approaching and parishad is afraid of possible disintegration of its store of votes. In fact parishad wish to use it for some hefty bargain, which the left front wish to take out without giving anything in return. Jai ho adivasi.

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