नहीं होने देंगे बंगाल का विभाजन–बिरसा

कालचीनी: कालचीनी में नेताजी जयंती के अवसर पर अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद आविप की ओर से आम सभा का खुला अधिवेशन आयोजित किया गया। रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे आविप के केंद्रीय अध्यक्ष संजीव भाई दामोर, मुख्य अतिथि के बतौर शिवाजी राव मोगे, आविप के संयोजक सीएल मुखर्जी, राज्य अध्यक्ष बिरसा तिर्की, डुवार्स-तराई आंचलिक अध्यक्ष जॉन बारला, प्रोग्रेसिव टी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष शुक्रा मुंडा, राजू बाड़ा और तौफिल सोरेंग। मुख्य अतिथि शिवाजी राव मोगे ने तिरंगा के साथ ही संगठन के ध्वज को भी फहराकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। आज कालचीनी आंचलिक कमेटी की पहल पर आयोजित आम सभा ने अमूमन जनसभा का रूप ले लिया जब हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग उपस्थित हुए। आविप के संयोजक सीएल मुखर्जी ने नेताजी की तस्वीर के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम को शुरू किया। कार्यक्रम के बाद हासीमारा-जयगांव आविप व कालचीनी आंचलिक कमेटी की ओर से बिरसा तिर्की और जॉन बारला के हाथों से 24 आदिवासी महिलाओं के बीच साडि़यों का वितरण किया गया। हासीमारा-जयगांव आंचलिक कमेटी और कालचीनी अंचल कमेटी ने मुख्य अतिथि को ज्ञापन सौंपकर एम्बुलेंस की मांग रखी। इसके बाद आदिवासी कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। कार्यक्रम का संचालन राजूबाड़ा ने किया। आज वक्ताओं ने केंद्र व राज्य सरकारों से आदिवासी हितों की रक्षा के लिए और सक्रिय होने का आह्वान किया। सभा को संबोधित करते हुए आविप के राज्य अध्यक्ष बिरसा तिर्की ने कहा कि हम किसी भी हालत में बंगाल का विभाजन नहीं होने देंगे। न ही हम डुवार्स व तराई क्षेत्र को अलग होने देंगे। यदि डुवार्स को अशांत करने की कोशिश हुई तो हम हर तरह से उसका जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि परिषद के आंदोलन के चलते हिन्दी भाषा में प्रश्नपत्र मिला है। यह हमारी बड़ी सफलता है। डुवार्स व तराई क्षेत्र में आदिवासी व गोरखा मिलजुल कर रह रहे हैं। इसलिए यहां के माहौल को अशांत करने की चेष्टा नहीं होनी चाहिए। गोजमुमो पहाड़ में ही अपने आंदोलन को सीमित रखे। उन्होने कहा कि आज परिषद के प्रयास से ही डुवार्स में बंद 14 चाय बागान खुलने लगे हैं। हालांकि किसी भी राजनैतिक दल ने इस दिशा में पहल नहीं की थी। वक्ताओं ने चाय श्रमिकों की मजदूरी न्यूनतम ढाई सौ रुपए करने व डुवार्स व तराई को छठी अनुसूची में शामिल किए जाने की जरूरत बताई। आम सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि शिवाजी राव मोगे ने कहा कि परिषद के आंदोलन के फलस्वरूप आदिवासी समुदाय को जमीन का पट्टा मिल रहा है। लेकिन आजतक आदिवासियों का रेजिमेंट नहीं है। उन्होंने कहा कि हम सेना में आदिवासी रेजिमेंट लेकर रहेंगे।साभार–दैनिकजागरण

 

अखिल भारतीय महली संघ की सभा संपन्न

बिन्नागुड़ी : वीरपाड़ा थाना अंतर्गत वीरपाड़ा प्राइमरी विद्यालय में आज अखिल भारतीय महली संघ की पांचवां प्रखंड स्तरीय जनसभा सम्पन्न हुआ। इस सभा की अध्यक्षता गोसांई महली ने किया तथा सभा के मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर बंगाल महली संघ कमेटी के महासचिव राम महली तथा अतिथि के रूप में भूतपूर्व सेंट्रल एक्साइज एवं कस्टम के सुप्रीटेंडेन्ट बीआर कछुआ, कमल टोप्पो महली, श्याम सुन्दर महली, चुमू महली, पहलू महली आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे। सभा के दौरान राम महली ने आदिवासी महली समुदाय के लोगों से कहा कि अपने समाज और परिवार के विकास के लिए शिक्षा को विशेष महत्व देना होगा। एक शिक्षित समाज ही अपने समाज के लोगों में जागरूकता फैला सकता है। भूतपूर्व कस्टम अधिकारी बी आर कछुआ ने कहा कि कोई भी समाज तभी समृद्ध होता है जब वे आपस में संगठित होते हैं और आत्मविश्वास से कोई भी कार्य को करे। आज के सभा में महिलाओं के शिक्षा एवं अन्य नये युवाओं को शिक्षित और संगठित रहने पर विशेष जोर दिया गया। सभा के अंत में एक भोज का आयोजन किया गया।

 

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Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

1 thought on “नहीं होने देंगे बंगाल का विभाजन–बिरसा”

  1. आदिवासी रेजीमेंट

    हमारे राष्ट्रीय पिता को भारतवासियों के रोजगार की चिंता है। इसके लिये वे किसी भी कीमत पर उद्योग लगाना चाहते हैं। इसके लिये चाहे उन्हें गरीबों का विस्थापन करना पड़े या उपजऊ जमीन की बलि देनी पड़े या चाहे खाद्य पदार्थ की कीमत आसमान छूने लगे।

    एक ओर सरकारी तत्वों द्वारा सेन्सस में घपला करके पूरा आदिवासी गाँव खाली बताया जा रहा है। और फ्री, प्राईऑर और इन्फोर्मड कोन्सेन्ट का नाजायज फायदा उठाकर एम ओ यू पर हस्ताक्षर किये जा रहे हैं। हाँ तो इन गैर कानूनी काम या घपले की जाँच कौन करेगा? घपला किसने किया? क्या इसकी जाँच कराना जरूरी नहीं है?

    दूसरी ओर उद्योगपति और सरकारी तत्व मिलकर आदिवासी सम्पत्ती को खुलेआम लूट रहे हैं। क्या एक सर्वजनिक नदी को बेच कर या लीज में देकर उसमें से खनिज निकालना एक लीगल या इल्लीगल (कानूनी या गैर कानूनी) काम है? अगर यह गैर कानूनी है तो यह एक चोरी हुई। इसकी जाँच कौन करेगा? क्या इसकी जाँच कराना जरूरी नहीं है?

    आज कितने आदिवासी युवक युवक्तियाँ बेरोजगार हैं। क्या हमारे राष्ट्रीय पिता को आदिवासियों के रोजगार की चिंता है? आदिवासी युवक गरीबी और अत्याचार से तंग आकर नक्सालाईट बन रहे हैं। नक्सालाईटस का अंत करने के लिये ग्रीन हंट के बदले अगर उनको सेना में भरती किया जाता तो कितना अच्छा होता। भारत एक शक्तिशाली देश होता, अत्याचार और आँतकवाद कम होता। इसलिये आदिवासी विकास परिषद की आदिवासी रेजीमेंट की माँग जायज है।

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