बागान के श्रमिक करेंगे भूख हड़ताल

बिन्नागुड़ी,: बानरहाट इलाके के रेडबैंक गु्रप के बंद चाय बागान सुरेन नगर के श्रमिक सड़कों पर उतर कर आंदोलन करने की धमकी दी है। श्रमिकों का कहना है कि बागान बंद होने के बाद भी श्रमिकों को सरकार सहित स्थानीय प्रशासन से किसी तरह की मदद नहीं मिल पाई है। इसलिए 31 जनवरी सोमवार से सुरेन नगर के श्रमिक राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 31 में भूख-हड़ताल में बैठेंगे। सोमवार को आदिवासी विकास परिषद के नेतृत्व में श्रमिक सड़क पर भूख हड़ताल में बैठेंगे। श्रमिकों का कहना है कि जब तक उन्हें इंसाफ नहीं मिलता तब तक हमलोग अपना आंदोलन जारी रखेंगे। चाय बागान के श्रमिकों का कहना है कि कब तक वे लोग विवशता एवं भूखमरी के जीवन को जियेंगे। इसलिए हमलोगों ने आंदोलन में उतरने का फैसला लिया है। आदिवासी विकास परिषद डुवार्स रीजनल कमेटी के अध्यक्ष जान बारला ने कहा कि रेड बैंक गु्रप के सुरेन नगर चाय बागान में कुल स्थायी श्रमिकों की संख्या 316 है तथा पांच स्टाफ है एवं सैकड़ों अस्थायी कर्मचारी है। जिनके हजारो परिवार के सदस्य चाय बागान बंद होने से भूख एवं कुपोषण के शिकार बनते जा रहे हैं। बागान के प्लान्टेशन को क्षेत्रफल 162 सौ हेक्टेयर जमीन में है जो पिछले 2003 से बंद पड़ा है। गत 2007 में बागान के मालिक राबिन पाल ने चाय बागान को खुल पाया एवं पत्तियों को तोड़कर बेचते रहे, लेकिन उस दौरान भी श्रमिकों का शोषण बदस्तूर जारी रहा। सुरेन नगर चाय बागान के मालिक पक्ष द्वारा किसी भी श्रमिकों को पीएफ एवं ग्रेच्यूटी का पैसा न ही जमा किया गया है न ही दिया गया है। श्रमिकों द्वारा आवाज उठाने पर मई 2010 में फिर से चाय बागान को बंद कर दिया है। जिसके बाद सुरेन दर चाय बागान के श्रमिकों को काफी दयनीय अवस्था में रहना पड़ रहा है। श्रमिकों का ऐसा हाल है कि नदी-नालों में पत्थर तोड़ कर जीविका निर्वाह करना पड़ रहा है। स्थानीय सुरेंद्र नगर चाय नगर के श्रमिक सुरेश कछुवा ने कहा कि सरकार द्वारा सौ दिन रोजगार योजना के तहत भी चाय श्रमिकों को काम ठीक से नहीं मिल पा रहा है। श्रमिकों का आरोप है, तीन महीने में एक सप्ताह का कार्य सौ दिन रोजगार का होता है। वह भी काम किए हुए वेतन देरी से मिलता है। जिससे श्रमिक काफी उपेक्षित एवं शोषित महसूस कर रहे हैं। डुवार्स तराई रीजनल कमेटी के अध्यक्ष जान बारला ने कहा कि सुरेद्र नगर चाय बागान के श्रमिक भूख एवं कुपोषण से पीडि़त हैं। उनके बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। ऐसे में श्रमिकों ने घूंट-घूंट के मरने के बजाय राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूख-हड़ताल में रह कर आंदोलन करते हुए सड़कों में सो कर अपनी जान देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा आविप सुरेन नगर चाय बागान श्रमिकों के साथ हैं। जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता तब तक आविप उनके साथ है। जान बारला ने सरकार से मांग की है कि जिस प्रकार से हर बंद बागान के श्रमिकों को स्कीम के तहत मासिक डेढ़ हजार रुपये मिलता है तथा राशन चिकित्सा की सुविधा मिलती है। वहीं सुविधा सुरेन नगर चाय बागान के श्रमिकों को मिलनी चाहिए। नहीं तो हमारा आंदोलन सोमवार से अनिश्चित कालीन तक के लिए जारी रहेगा। जान बारला ने कहा कि जितने भी बंद चाय बागान हैं उन्हें तत्काल सरकार को अपने कब्जे में लेकर खोलने की पहल करनी होगी नहीं तो आने वाले दिनों में आविप बृहत आंदोलन करने को विवश होगी।

 

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Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

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