विकास के मुद्दे पर समझौता की गुंजाइस

सिलीगुड़ी, : आदिवासी विकास परिषद तराई-डुवार्स के आदिवासियों के विकास के लिए पूरी तरह से कटिबद्ध है। इसलिए आविप ने इस विधानसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारा है। आविप गोजमुमो के साथ सीटों के मुद्दे को छोड़कर विकास के मुद्दे पर समझौता करने के लिए तैयार है। इस मुद्दे को लेकर गोजमुमो द्वारा तराई-डुवार्स के लिए गठित कमेटी के साथ आविप के स्थानीय नेताओं से वार्ता हो चुकी है। आने वाले एक दो दिनों में गोजमुमो की कोर कमेटी के बैठक के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। उसके बाद आविप भी पूरी तरह से चुनाव मैदान में उतर जाएगी। उक्त बातें आविप के रीजनल कमेटी के अध्यक्ष जॉन बारला ने कही। उन्होंने बताया कि तराई-डुवार्स में छह सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी और इसमें किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं होगा। कांग्रेस के साथ गठजोड़ की चर्चा करते हुए श्री बारला ने बताया कि कांग्रेस और तृणमूल के साथ समझौता हो चुका है और तृणमूल ने अपने प्रत्याशियों की घोषणा भी कर चुका है, जिसमें डुवार्स भी शामिल है। ऐसे में कांग्रेस के साथ समझौता संभव नहीं है। रही बात गोजमुमो के साथ समझौते की तो आविप उनके चुनाव पर्यवेक्षकों को अपनी बात कह दिया है अब गोजमुमो के जवाब की प्रतीक्षा है। उधर गोरखाजन मुक्ति मोर्चा के महासचिव रोशन गिरि ने कहा कि जो भी फैसला होगा वह 24 मार्च को दार्जिलिंग जिमखाना क्लब में होने वाली बैठक के बाद ही होगा। उन्होंने बताया कि अगर आविप अपने प्रस्ताव गोजमुमो की तराई-डुवार्स की कमेटी के सामने रखा है और जैसा रिपोर्ट पेश करेगी उसी आधार पर फैसला लिया जाएगा। श्री गिरि ने कहा कि आविप और गोजमुमो दोनों ही वाममोर्चा की सरकार की अनदेखी के शिकार है। डुवार्स में भी इस सरकार ने आदिवासियों को छला है और पहाड़ की जनता को उसका हक देने में आनाकानी करते हुए राह रोड़े अटका रही है। इसलिए पहाड़ और तराई डुवार्स की जनता को इसका जवाब वाममोर्चा सरकार को इसी चुनाव में देना होगा। श्री गिरि ने कहा कि जब पहाड़ की जनता ने अपने हक के लिए आंदोलन को उतरी तो इस सरकार ने निहत्थे गोरखाओं पर गोली बरसाई जिसमें दो गोरखा शहीद हो गए। वहीं डुवार्स और पहाड़ की जनता के बीच आपसी सौहार्द और भाई चार बढ़ाने के लिए गोजमुमो सुप्रीमो विमल गुरुंग की शांति यात्रा की राह में निषेधाज्ञा के रोड़ अटकाएं इससे साफ जाहिर होता है कि इस सरकार की मंशा गोरखाओं और आदिवासियों के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने सभी का आ ान करते हुए कहा कि कहा कि अब समय आ चुका है और जनता को अपने हक लिए वाममोर्चा सरकार को मुंहतोड़ जवाब देना होगा। गोरखाओं को अपनी अस्मिता के लिए बंगाल सरकार से हिसाब चुकता करना होगा। अगर हमारी लड़ाई में आविप का साथ मिलता है तो हम आदिवासियों के हक में आवाज बुलंद करेंगे।साभार–दैनिकजागरण

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Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

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