चाय श्रमिकों की मजदूरी के मुद्दे पर नहीं बनी बात

सिलीगुड़ी, : चाय उद्योग के श्रमिकों के वेतन बढ़ोत्तरी को लेकर मंगलवार को अतिरिक्त श्रमायुक्त सुबल विश्वास व दार्जिलिगं, तराई डुवार्स के मजदूर यूनियनों भाग लिया। जबकि इस बैठक में प्रोगेसिव टी वकर्स यूनियन भाग नहीं ले सकी। बैठक को संबोधित करते हुए श्री विश्वास ने कहा कि सिर्फ दार्जिलिंग के लिए अलग से वेतन बढ़ोत्तरी की मांग नियम के विरूद्ध है और अगर होता है इसके लिए श्रम विभाग जिम्मेदार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि चाय उद्योग ही नहीं अपितु राज्य के सभी उद्योग एक ही परिधि में आते हैं। किसी भी क्षेत्र के उद्योग में वेतन का दायरा एक होता है। श्रम विभाग के नियमों की चर्चा करते हुए श्री विश्वास ने कहा कि अगर किसी उद्योग अलग से वेज निर्धारण की बात होती है तो उसके लिए अलग से फोरम लाना होगा। अगर इस मामले का फोरम नहीं आता है तो इसके लिए श्रमविभाग जिम्मेदार नहीं है। दार्जिलिंग तराई डुवार्स प्लांटेशन यूनियन के महासचिव सूरज सुब्बा ने कहा कि गोजमुमो समर्थित यूनियन अंग्रेजों के जमाने की बढा़ेत्तरी प्रथा को तोड़ना चाहता है। अगर मजदूरी बढ़ोत्तरी की यही प्रथा रही तो मजदूर मर जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 में चाय श्रमिकों की मजदूरी 4.10 से 4.50 पैसे तक बढ़ी है, जबकि महंगाई आसमान छू रही है। श्री सुब्बा ने कहा कि श्रम विभाग की बैठक में मजदूरों को बीडीए देने की रिपोर्ट पेश की गई है। सरकार व श्रमिक संगठन बताए कि किस मजदूर को कितना वेतन मिलता है, सच्चाई तो यह है कि मजदूरों को वेतन सिर्फ खाते पर मिलता है और बीडीए देने की बात हो रही है। जबकि एक दो बागनों को छोड़ दे तो सुविधाएं कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि दार्जिलिंग के कुछ बागान तो ऐसे है जहां पर चाय श्रमिकों को लाखो रूपये चिकित्सा बिल पड़ा हुआ है और मालिक दे नहीं रहा है। ऐसे में श्रमिक आंदोलन नहीं करेगा तो करेगा? श्री सुब्बा ने कहा कि दार्जिलिंग की चाय अलग है, कार्यशैली अलग है, बाजार अलग है तो वेतन भी अलग होना चाहिए। हम लोग पुराने सिस्टम को खत्म कर नया सिस्टम चाहते हैं इसके लिए केन्द्र व राज्य सरकार को पहल करती होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि दार्जिलिंग तो पहल है समतल भी होंगे इसी तरह के आंदोलन। जबकि मालिक और सरकार मजदूरों की मांगों पर ध्यान नहीं देगी तब तक चाय का निर्यात बंद होगा। आज की बैठक का मुख्य मुद्दा चाय श्रमिकों को बीडीए देने की मांग थी। जिस पर सरकार द्वार गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट भी इस बैठक में सौंपी है। कमेटी ने कहा है कि सभी चाय श्रमिकों को बीडीए मिलना चाहिए और यह मालिक और मजदूर को तय करना होगा। बैठक में दार्जिलिंग चाय के निर्यात पर लगी रोक को श्रमिकों ने उद्योग के हित में नहीं बताते हुए कहा है कि इस तरह की प्रथा को बंद करना चाहिए। श्रमिक संगठनों को मजदूरी बढ़ोत्तरी के बावत 15 अप्रैल तक अपना रिपोर्ट श्रम विभाग को सौंपना है। इस बैठक में सिलीगुड़ी के लेबर कमिश्नर रिजवान, सीसीपीए महासचिव मनोजीत दास गुप्ता व भाष्कर चालिया, आईपीए के रिजनल कमेटी चेयरमैन तपन चौधरी और मजदूर यूनियन के अजीत सरकार, आलोक गांगुली, जीआउल आलम और प्रेम निराला समेत कई मजदूर संगठनों के सदस्य मौजूद थे। साभार–दैनिकजागरण

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Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

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