हक के लिए बागान श्रमिकों ने कमर कसी

नागराकाटा,: चाय श्रमिकों की मजदूरी न्यूनतम ढाई सौ रुपए करने और चाय बागान में उन्हें जमीन का पट्टा दिए जाने समेत 15 सूत्री मांगों के समर्थन में शनिवार को आविप समर्थित श्रमिक संगठन के नेतृत्व में गेट मीटिंग की गई। शनिवार को प्रोग्रेसिव टी वर्कर्स यूनियन की डुवार्स-तराई के 265 बागान की इकाईयों ने चाय बागान के कार्यालयों के समक्ष गेट मीटिंग की। मीटिंग एक घंटे तक चली। विगत दिवस शुक्रवार को यूनियन की ओर से चाय बागान के मालिकों के संगठन कन्सलटेटिव कमेटी ऑफ प्लांटेशन एसोसिएशंस (सीसीपीए) को 15 सूत्री ज्ञापन प्रेषित किया गया। यूनियन के सूत्र के अनुसार ज्ञापन में मुख्य रूप से श्रमिकों की दिहाड़ी ढाई सौ रुपए करने, डुवार्स-तराई के चाय बागानों में जमीन का पट्टा श्रमिकों के नाम करने, करमा पूजा पर मजदूरों को सवैतनिक छुट्टी, प्रत्येक श्रमिक आवास में बिजली की आपूर्ति, सड़क बिजली प्रदान, पुराने पड़ चुके आवासों की मरम्मत व नए आवासों का निर्माण, पेयजल की व्यवस्था, चाय श्रमिकों को बीपीएल सूची में शामिल करने, सभी तक के बकाए का भुगतान, अस्थाई श्रमिकों को नियमित करने, सेवानिवृत्त श्रमिकों के बकाए पीएफ व ग्रेच्युटी का भुगतान, वन्य पशुओं के हमलों के शिकार श्रमिकों के लिए मुआवजे की व्यवस्था और विभिन्न मांगों को लेकर सीसीपीए के प्रतिनिधियों के साथ जल्द बैठक की व्यवस्था की मांग शामिल हैं। यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष सुकरा मुंडा ने कहा कि आंदोलन के दूसरे चरण में गेट मीटिंग का आयोजन किया गया। हम चाय उद्योग को नुकसान पहुंचाए बिना ही श्रमिकों की मांगों को पूरा कराने का प्रयास कर रहे हैं। उम्मीद है कि प्रशासन इसके लिए जल्द त्रिपक्षीय बैठक आयोजित करेगा। इस प्रसंग में चाय बागानों के बाबू स्टाफ के संगठन इंप्लाइज सेल के महासचिव बाबन गोप ने कहा कि वर्तमान में 67 रुपए की मजदूरी से परिवार चलाना बेहद मुश्किल काम है। इसलिए मजदूरी वृद्धि हमारी प्राथमिकता है। यूनियन के उपाध्यक्ष तेज कुमार टोप्पो ने कहा कि प्रत्येक चाय बागान के प्रबंधक के जरिए सीसीपीए को ज्ञापन प्रेषित किया गया है। यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो हम वृहद आंदोलन शुरू करेंगे। यूनियन के आंदोलन को समर्थन करते हुए नागराकाटा प्रखंड के ग्रासमोड़ चाय बागान के विनोद उरांव, अनुप लाकड़ा, कैरन चाय बागान की दुर्गी मुंडा और कालचीनी के दलसिंह पाड़ा बागान की रीता मुर्मू ने कहा कि 31 मार्च 2011 को श्रमिकों के साथ बागान मालिकों का वेतन समझौते की अवधि समाप्त होती है। सेवानिवृत्त होने पर हमें बाबान की आवास समेत कई सुविधाएं छोड़नी पड़ती है। हालांकि पीएफ व ग्रेच्युटी जैसे भुगतान समय पर नहीं किए जाते। उधर, बागान मालिकों के संगठन डीबीआइटीए के सचिव प्रवीर कुमार भट्टाचार्य ने कहा कि सरकार यदि पहल करती है तो त्रिपक्षीय बैठक के जरिए समस्या का हल संभव है। बिन्नागुड़ी संवाददाता के अनुसार मध्य डुवार्स के बानरहाटा थानांतर्गत सभी चाय बागानों में आज सुबह सात बजे से आठ बजे तक एक घंटे के लिए गेट मीटिंग की गई। इसमें काफी संख्या में श्रमिक शामिल हुए। यूनियन के सहायक सचिव अमरधन बाकला ने शनिवार को बताया कि यूनियन की सभी शाखाओं को पत्र देकर गेट सभा की पूर्व सूचना दी गई थी। इसीलिए भारी संख्या में श्रमिक इन डुवार्स व तराई के 265 चाय बागान की सभाओं में शामिल हुए।

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Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

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