रेल सुविधाओं में कटौती का विरोध

चामुर्ची,: सिलीगुड़ी में केंद्रीय रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी को हिमालय नेचर एंड एडवेंचर फाउण्डेशन (नैफ) द्वारा हाथी की रेल से हुई दुर्घटना के मद्देनजर रात में डुवार्स क्षेत्र में रेलसेवा बंद करने तथा ट्रेनों की संख्या कम करने से संबंधित ज्ञापन सौंपने का डुवार्स के विभिन्न संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। ज्ञापन में डुवार्स की रेलसेवा उन्नत किए जाने या विकल्प व्यवस्था के बदले एनजेपी से धुपगुड़ी स्टेशन तक डबल लाइन बनाने की मांग डुवार्स के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण दर्शाता है। डुवार्स के परिचालन कमेटी के अध्यक्ष डा.पार्थप्रतीम ने बताया कि डुवार्स में स्वाधीनता के बाद से सड़क व्यवस्था पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाई है। फोरलाइन सड़क भी डुवार्स से होकर बनने वाली थी। वह भी जलपाईगुड़ी ने छीन ली। यातायात के लिए डुवार्स की लाइफ लाइन (जीवनरेखा) कही जाने ट्रेन को भी ठप करने की साजिश हो रही है। उन्होंने कहा कि एनजेपी से लेकर अलीपुरद्वार जंक्शन 168.22 किमी है। एलीफेंट जोन में फ्लाईओवर ब्रिज एवं कई वैकल्पिक उपाय द्वारा हाथी की दुर्घटना को रोका जा सकता है। मगर इसके लिए डुवार्सवासियों को रेल यातायात की सुविधा से वंचित करना ठीक नहीं है। बानरहाट आदिवासी विकास परिषद के ब्रांच सहसचिव विधान सरकार ने बताया कि डुवार्स में पैसेंजर ट्रेन एम्बुलेंस का दर्जा प्राप्त है। हाथी की दुर्घटना वन विभाग की लापरवाही से हो रही। वन विभाग में कई पद रिक्त हैं। उस पर डुवार्स के युवकों की बहाली होनी चाहिए।विधान सरकार ने बताया कि मालगाड़ी को डुवार्स रूट में नहीं चलाकर यात्री वाहक ट्रेनों को यथावत रखना होगा। हेमन्टनगंज व्यवसायी समिति के कुमारजीत चौधरी ने बताया कि सिलीगुड़ी उत्तर बंगाल की राजधानी मानी जाती है। स्वास्थ्य, शिक्षा, परिसेवा के लिए डुवार्स के लोग रेल पर ही निर्भर हैं। बारिश के दिनों में डुवार्स का सड़क मार्ग प्राय: अवरोध रहता है। ऐसे में रेलवे परिसेवा कम करना तथा बंद करने की मांग डुवार्स के प्रति सौतेलापन दर्शाता है। माल बाजार जनजागरण मंच के प्रभात दे तथा नागराकाटा के समाजसेवी अभिजीत दत्ता ने बताया कि सिलीगुड़ी से अलीपुरद्वार तक 21रेलवे स्टेशन हैं जहां पैसेंजर ट्रेन रूकती है। इन इलाके में अधिकांश लोग रेल यातायात पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि हाथी भी हमारे देश के वन संपदा है लेकिन एक और हाथी की दुर्घटना के विषय को लेकर डुवार्सवासियों को रेल परिसेवा से वंचित करने की साजिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सिर्फ शहरों में रहकर जमीनी स्तर की समस्या को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। ओदलाबाड़ी उन्नयन परिषद के जीवन मित्र ने भी नैफ की डुवार्स में रेल परिसेवा के बारे में दिए गए स्मारक पत्र की निंदा की है। उन्होंने कहा कि रेलवे, वन विभाग तथा सभी गैर राजनीतिक संगठनों को इस विषय की पहल करते हुए ऐसे वैकल्पिक उपाय सोचना चाहिए जिससे हाथी भी दुर्घटना का शिकार न हों एवं रेल यातायात भी कायम रहे। उल्लेखनीय है कि डुवार्स से 15765 टाउन इंटरसिटी, 55429 पैसेंजर सहित कैपिटल, महानंदा, कंचनकन्या, गुवाहाटी एक्सप्रेस सहित दर्जनों यात्री ट्रेन चलती है। साभारदैनिकजागरण

Advertisements

Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

I am thankful to you for posting your valuable comments.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s