सीमांकन से संघर्ष की जमीन तैयार

अशोक झा, सिलीगुड़ी केंद्र व राज्य सरकार द्वारा किए गए जीटीए (गोरखालैंड टेरोटरी एडमिनिस्ट्रेशन) समझौते के बाद से हिल्स में आंदोलनों की गूंज फिलहाल थम गई है। इस बीच हिल्स में पर्यटकों की आवाजाही भी लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर जीटीए के सीमांकन को लेकर एक बार फिर से आंदोलन और संघर्ष की जमीन तैयार होने लगी है। गोजमुमो ने मुख्यमंत्री की सर्वदलीय बैठक में सीमांकन पूरा होने तक नए जिलों का निर्माण नहीं करने की मांग की है। इस स्थिति ने उत्तर बंगाल की खुफिया एजेंसियों और प्रशासन को परेशानी में डाल रखा है। उनको इस बात की चिंता है कि सीमांकन के सर्वेक्षण के लिए बनी हाई कमेटी की बैठक 30 अगस्त को कोलकाता में होनी है। दुर्गापूजा पूर्व सीमांकन सर्वेक्षण प्रारंभ हुआ तो उत्सवी माहौल न होकर आंदोलन का माहौल भी बन सकता है। प्रशासन की ओर से सभी थानों को निर्देश दिया गया है कि वह पक्ष-विपक्ष की गतिविधियों पर नजर रखें। गोरखाजनमुक्ति मोर्चा अपने अलग राज्य के आंदोलन में प्रस्तावित गोरखालैंड में हिल्स के अलावा तराई डुवार्स को शामिल करने की मांग करती रही थी। साथ ही सीमांकन और 196 मौजा को शामिल करने की मांग उठाई गई। विरोध और संघर्ष के बाद 18 जुलाई को त्रिपक्षीय समझौते में तय हुआ कि प्रस्तावित 196 मौजा के लिए हाईपावर कमेटी सर्वेक्षण करेगी। सर्वेक्षण में यह देखा जाएगा कि किस क्षेत्र में किस वर्ग के लोगों की संख्या अधिक है। लोग कहां रहना चाहते हैं। जिन मौजों को शामिल करने की मांग की गई है उसमें तराई के माटीगाड़ा वन और टू का मौजा, अठारहखाई का पार्ट, अपर बागडोगरा, मनीराम ग्राम पंचायत, बुढ़ागंज ग्राम पंचायत, रानीगंज पानीसाली ग्राम पंचायत, हेतमुढ़ी सिन्धीमोड़ा ग्रामपंचायत का पार्ट, डाबग्राम, चंपासारी, पत्थरघाटा का पार्ट, नगर निगम का वार्ड 41,42,45,46 और 47 का ज्यादातर भाग शामिल हैं। इसके अलावा डुवार्स के माल, वीरपाड़ा, कालचीनी, नागराकाटा, बानरहाट, मदारीहाट तथा कुमारग्राम के मौजों को भी शामिल करने की मांग की जा रही है। इस मांग पर विरोधी संगठनों ने भी अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। सीमांकन के बाद भी संगठन अपने आंदोलन व संघर्ष की जमीन तैयार करने में जुटे हुए हैं। कौन है हाईपावर कमेटी में बनाई गई हाई पावर कमेटी में गोजमुमो तराई से शंकर अधिकारी, एलवी परियार, डुवार्स से किताब सिंह राई तथा एसएन प्रधान है। जबकि सरकार की ओर से दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी के जिलाधिकारी और दागोपाप के प्रशासक को इसमें शामिल किया गया है। कौन कर रहा है विरोध सीमांकन का राज्य के पूर्व मंत्री सह दार्जिलिंग जिला वाममोर्चा के संयोजक अशोक नारायण भट्टाचार्य विरोध करते है। उनका कहना है कि दागोपाप क्षेत्र को छोड़ जीटीए में कोई भी क्षेत्र शामिल किया गया इसका विरोध संघर्ष का रूप ले सकता है। तराई-डुवार्स अशांत हो जाएगा। बंगभंग विरोधी संगठन आमरा बंगाली, बांग्ला व बांग्लाभाषा बचाओ कमेटी, जनचेतना, राष्ट्रीय शिवसेना और आदिवासी विकास परिषद तराई डुवार्स की एक इंच जमीन देने का भी विरोध कर रही हैं। आदिवासी विकास परिषद के तराई डुवार्स रीजनल कमेटी के अध्यक्ष जॉन बारला का कहना है कि वह गोजमुमो के आंदोलन के विरोधी नहीं हैं। हिल्स के अलावा तराई डुवार्स की जमीन को उसमें शामिल किया गया तो उसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। क्या कहना है गोजमुमो का गोजमुमो के महासचिव का कहना है कि हमारी मांग तथ्यों के आधार पर है। लोकतंत्र में लोगों का मौलिक अधिकार है कि वह देश के अंदर किसी भी क्षेत्र में रहने की मांग कर सकते है। तराई डुवार्स के गोरखा बाहुल्य क्षेत्र को शामिल करने की मांग पूरी तरह जायज है। सर्वेक्षण के बाद यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि वहां के लोग क्या चाहते हैं।

Advertisements

Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

I am thankful to you for posting your valuable comments.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s