अंधेरे में है हिन्दी भाषी छात्रों का भविष्य

जलपाईगुड़ी, : पूरे देश सहित पश्चिम बंग में हर साल पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के बतौर पूर्व राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म दिन मनाया जाता है। लेकिन एक सवाल जो उत्तर बंगाल के विभिन्न जिलों के प्रशासन के सामने बार बार उभरकर आता है कि क्या हिन्दी भाषी छात्र वर्ग और शिक्षकों की समस्याएं सुनी जाती हैं। जलपाईगुड़ी जिले के बांग्ला स्कूलों की तुलना में हिन्दी माध्यम के विद्यालयों का बुनियादी ढांचा संतोषजनक बिल्कुल नहीं कहा जा सकता है। इससे हिन्दी माध्यम से पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को कई तरह की समस्याओं से रूबरू होना पड़ रहा है। जिले में बांग्ला माध्यम के विद्यालयों की तुलना में हिन्दी माध्यम के विद्यालयों की संख्या गिनती के हैं। इन विद्यालयों के शिक्षक व शिक्षिकाओं का आरोप है कि ग्यारहवीं व बारहवीं कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या इतनी अधिक है कि एक ही बेंच पर सात से आठ विद्यार्थियों को दबदबकर बैठना पड़ता है। पर्याप्त शिक्षकों के अभाव में भी पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। जिले की कौन कहे अभी तक उत्तर बंगाल में एक भी हिन्दी माध्यम का कॉलेज नहीं है जबकि इसके लिए विगत एक दशक से आंदोलन हो रहा है। इसलिए उच्च शिक्षा में विद्यार्थी पिछड़ते जा रहे हैं। कई बार तो हिन्दी भाषी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के संसाधन के अभाव में पढ़ाई को अलविदा कहना पड़ता है। बहुत से विद्यार्थियों को हिन्दी माध्यम के स्कूल के अभाव में बांग्ला माध्यम वाले स्कूलों में दाखिला लेना पड़ता है। लेकिन भिन्न भाषा के माध्यम के चलते वे पढ़ाई में बेहतर नहीं कर पाते। कुल मिलाकर जलपाईगुड़ी जिले में 550 हाई स्कूल हैं। इनमें से हिन्दी माध्यम के हाई स्कूल केवल 18 हैं। नए सेटअप हाई स्कूल की संख्या 48 है। पहले तो हिन्दी माध्यम के विद्यालयों की माध्यम व उच्च माध्यमिक परीक्षा में एक भी प्रश्नपत्र हिन्दी में नहीं आता था। इसके प्रतिवाद में कई बार विभिन्न संगठनों ने आंदोलन किया। शुरू में अस्सी के दशक में गणित का प्रश्नपत्र हिन्दी में दिया गया। उसके बाद फिर जब नब्बे के दशक में विभिन्न सामाजिक संगठनों ने हिन्दी प्रश्नपत्र के लिए आंदोलन किया तब जाकर तत्कालीन राज्य सरकार हरकत में आई। आखिर में आविप के आंदोलन के दबाव में आकर सरकार ने विज्ञान के प्रश्नपत्र भी हिन्दी में देने का निर्णय लिया। अभी पिछले साल से सभी विषयों के प्रश्नपत्र हिन्दी में आने लगे हैं।साभार दैनिकजागरण

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Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

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