समता जजमेंट के लिए जमीन तलाशती सरकार

विनोद श्रीवास्तव ! सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में आंध्र प्रदेश की तर्ज पर झारखंड में भी समता जजमेंट को प्रभावी बनाने की पुरजोर कोशिश शुरू हो गई है। जनजातीय परामर्शदातृ परिषद की पहल पर विधायक साइमन मरांडी की अअध्यक्ष्‍ता वाली उपसमिति झारखंड में इस जजमेंट की उपयोगिता की जमीन तलाश रही है। इस बाबत आंध्र और झारखंड की परिस्थितियों का मूल्यांकन हो रहा है। बहुत संभव है कि उपसमिति विस्तृत अध्ययन के लिए आंध्र का भी रुख करे। समता जजमेंट पर गौर करें तो इसमें प्रकृति से जुड़े रहने वाले आदिवासियों की हित रक्षा की बात कही गई है। उन्हें जल, जंगल और जमीन से अलगथलग करने वाले सारे हथकंडों पर प्रतिबंध लगाने का उपबंध इस जजमेंट में किया गया है। यह कहे कि राज्य में इसे कानूनी जामा पहनाने के बाद आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासी तो क्या सरकार भी आसानी से नहीं खरीद सकती। जजमेंट में आदिवासी भूमि के हस्तांतरण मामले में सरकार को सरकार नहीं, बल्कि एक व्यक्ति कहा गया है। ऐसे में राज्य में समता जजमेंट प्रभावी हो जाने के बाद आदिवासियों की कितनी उन्नति होगी और राज्य का विकास कितना होगा यह भविष्य के गर्भ में है। विशेषज्ञों की सुने तो आंध्र प्रदेश, जहां जनजातीय आबादी सात प्रतिशत के आसपास है, में आदिवासियों के जमीन की संरक्षा के लिए यह जजमेंट महत्व की विषय वस्तु हो सकती है। इससे हटकर झारखंड जहां इनकी आबादी 26 फीसदी है और राज्य में मौजूद जमीन के बड़े हिस्से पर उनकी मौजूदगी है, जजमेंट को यहां ठोक बजाकर ही प्रभावी करना होगा। बेहतर तो होगा कि झारखंड की परिस्थितियों के अनुकूल इसमें संशोधन की गुंजाइश भी खोजी जाए। इधर, राज्य के उद्योगपतियों और कारपोरेट घरानों में भी समता जजमेंट पर बहस छिड़ गई है। इनकी सुने तो उद्योग लगाने को यहां पहले से ही जमीन का टोटा है। करार होने बावजूद 55 कंपनियों को जमीन नहीं मिल रही। बहरहाल हाल ही में हुई उप समिति की पहली बैठक का कुछ फलाफल नहीं निकल सका है। उप समिति ने जिला खनन पदाधिकारियों से यह जानना चाहा था कि अनुसूचित क्षेत्रों में जारी खनन कार्यो से अनुसूचित जनजातियों को कितना लाभ हुआ, खनन में उनकी कितनी जमीन गई, पदाधिकारियों ने रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई, नतीजतन उप समिति की 24 सितंबर की बैठक टालनी पड़ी। बहरहाल राज्य में इस जजमेंट से संबंधित विधेयक के सूत्रीकरण से लेकर इसे लागू करवाने तक की जवाबदेही निभा रही उपसमिति ने सरकार ने समक्ष अपनी डिमांड भी रख दी है। उपसमिति के अध्यक्ष और सदस्यों का ओहदा क्या होगा, उन्हें क्या सुविधाएं मिलेंगी इस पर बहस छिड़ गई है। कही रूतबे की होड़ में मूल मसला पीछे न छूट जाए।साभार दैनिकजागरण

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Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

2 thoughts on “समता जजमेंट के लिए जमीन तलाशती सरकार”

  1. The Samata Judgment is very vital for Adivasi people of India. As Adivasi societies live in and around of the jungle and those region where valuable minerals are deposited. The govt. and the industrialists are very much eager to displace the adivasi people from those places. If Samata Judgement is implemented in Jharkhand then there would be improvement in the conditions of adivasi as this will protect them from external threat and exploitation.

    1. शनिचरवाजी,

      आपने बिल्‍कुल ठीक कहा है कि समता जजमेंट आदिवासियों के विकास में मददगार साबित होगा1 समता जजमेंट के आधार पर झारखण्‍ड में नियम लागू हो जाने पर खखन और अन्‍य कारणों से हो रहे विस्‍थापन को नियंत्रण करने में मदद मिलेगी। जमीन पर स्‍थानीय लोगों का मालिकाना हक स्थिति में व्‍यापक बदलाव लाएगा इतना तो तय है।

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