मेरे साथ चल घर में रह कर क्या करेगी

रांची : मेरे साथ चल, घर में रहकर क्या करेगी? साथ रहोगी तो पैसे भी मिलेंगे। ऐसा प्रलोभन नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सलियों की ओर से युवतियों को दिया जाता है। लातेहार, चतरा, पलामू आदि जिलों की अधिकांश युवतियां, जिनकी उम्र पंद्रह से बीस के बीच है, दहशत में जीती हैं। रोशन बाड़ा बरवाडीह (बदला हुआ नाम)की है। दो भाई एक बहन। दोनों छोटे भाई पढ़ते हैं। पिता खेती करते हैं। बरसात ठीक हुई तो खाने भर का अनाज मिल जाता है। अन्यथा किसी तरह पेट की आग बुझती है। रोशन ने 2007-08 में मैट्रिक किया। इसके बाद आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर सकी। घर में रहने के बाद नक्सलियों की नजर पड़ी और टीम में शामिल होने के लिए दबाव बनाने लगे। रात में आते, कहते, घर में रहकर क्या करोगी, मेरे साथ चलो। वहां पैसे भी मिलेंगे। जब उनकी बातों को अनसुना किया जाता तो धमकी पर उतर जाते। भाइयों की हत्या की धमकी देते, घर वालों को मारने की धमकी देते।साभार-दैनिकजागरण
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Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

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