आदिम जनजातियों का धरना समाप्त

रांची,  पिछले सात नवंबर से राजभवन के समक्ष और इसके बाद मोरहाबादी में चल रही आदिम जनजातियों का धरना मंगलवार को समाप्त हो गया। धरने में गढ़वा, पलामू, लातेहार व पं सिंहभूम के करीब सवा सौ लोग बैठे थे। पहले लोग आमरण अनशन पर थे। जब तीन लोगों की हालत बिगड़ी, तब भी प्रशासन हरकत में नहीं आया। किसी तरह खुद ही स्लाइन चढ़ाए। इसके बाद गीताश्री उरांव-बंधु तिर्र्की की पहल पर सीपी सिंह ने अनशन तुड़वाया। पर, धरना जारी रहा। मंगलवार को धरना भी समाप्त हो गया। इस मौके पर गीताश्री उरांव, प्रदीप बलमुचू, विधायक अनंत प्रताप देव भी पहुंचे। प्रदीप बलमुचू ने कहा कि 17 को मुख्य सचिव व राज्यपाल के प्रधान सचिव से मिलकर कार्रवाई के लिए प्रेरित किया जाएगा। सीताराम भगत ने कहा कि विस अध्यक्ष ने भी आश्वासन दिया है कि शीतकालीन सत्र में इस मुद्दे को खुद उठाएंगे। आदिम जनजाति का हक मिलकर रहेगा। गीताश्री ने कहा कि सात से चल रहे अनशन को लेकर सरकार का कोई अधिकारी गंभीर नहीं था। भूख हड़ताल पर बैठे तीन की हालत बिगड़ गई तब भी प्रशासन नहीं जगा। इस मामले को विधानसभा सत्र में उठाया जाएगा। क्या है मांगें राज्य की सरकार ने 2008 में कैबिनेट में पास किया था कि आदिम जनजातियों में जो आठवीं तक पास हैं, उनकी सीधी नियुक्ति की जाएगी। लेकिन सरकार ने अब तक नियुक्ति नहीं की। गढ़वा के डीसी ने बताया कि इसके लिए कागजी कार्रवाई तेज कर दी गई। शीघ्र की नियुक्ति की जाएगी। पर, सरकार क्या करेगी, यह तो समय बताएगा। लेकिन विलुप्त हो रही जनजाति के लोग अब कमर कस चुके हैं। कौन-कौन जनजातियां होंगी लाभान्वित : हिल खडि़या, सौरिया पहाडि़या, माल पहाडि़या, कोरवा, पड़हिया, बिरजिया, बिरहोर, असुर व साबर। ये सभी आदिम हैं और इनकी संख्या लगातार घट रही है।
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Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

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