बिरसा की मौजूदगी में हुई थी बैठक : विमल

नागराकाटा–: जॉन बारला नहीं, बल्कि विगत 18 अक्टूबर को पहली बार नई दिल्ली में गोजमुमो नेतृत्व के साथ आविप नेताओं की जो बैठक हुई थी उसमें बिरसा तिर्की भी मौजूद थे। सिब्चू के कुमानी में रविवार को आयोजित एक संयुक्त सभा को संबोधित करते हुए गोजमुमो प्रमुख विमल गुरूंग ने उक्त खुलासा किया। उन्होंने कहा कि उस बैठक में जीटीए पर बातचीत हुई थी। बैठक में जॉन बारला के अलावा पीटीडब्लूयू के अध्यक्ष सुकरा मुंडा भी थे। उधर, आविप के राज्य अध्यक्ष बिरसा तिर्की ने कहा कि यह सही है कि बैठक में वह शामिल थे। लेकिन जीटीए के प्रस्ताव पर उनकी सहमति नहीं थी। रविवार को जीएलपी के मैदान में संयुक्त जनसभा में गोजमुमो के महासचिव रोशन गिरि, प्रचार सचिव और कालिम्पोंग के विधायक डा. हर्क बहादुर छेत्री, ट्रेड यूनियन नेता पीटी शेर्पा के अलावा आविप नेता जॉन बारला, सुकरा मुंडा, पारस नाथ बराइक, घुरन उरांव उपस्थित रहे। इस संयुक्त जनसभा को संबोधित करते हुए दोनों ही संगठनों के अध्यक्षों ने घोषणा की कि छह दिसंबर को प्रत्येक चाय बागान में दोनों संगठनों की संयुक्त समन्वय समिति गठित कर घर घर संयुक्त प्रचार किया जाएगा। दस दिसंबर को संकोश से फांसीदेवा तक जीएटीए के समर्थन में रैली की जाएगी। विमल गुरूंग ने संवाददाता के एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि जीएलपी का मैदान ऐतिहासिक स्थल है जहां विगत आठ फरवरी को शिब्चू में गोजमुमो के लोकतांत्रिक आंदोलन पर पुलिस ने गोली चलाई थी। उसमें उनके तीन समर्थक मारे गए थे। उसी ऐतिहासिक दिन की याद में यह जनसभा की गई है। उन्होंने कहा कि उनकी पीपीपी के साथ भी बैठक हुई है। उन्हें अब जीएटीए का विरोध बंद कर देना चाहिए। बहुत तकलीफ से दोनों समुदायों के बीच सेतु तैयार हुआ है। इस सेतु को तोड़ने का प्रयास होगा। इससे सतर्क रहना होगा। अब जॉन बारला और सुकरा मुंडा को दोष देने से कोई लाभ नहीं है। कोलकाता और दिल्ली में बैठकर जीएटीए का विरोध करने वाले नेताओं को निकाल बाहर करना होगा। डीएमआइ के गामटा नामकरण प्रस्ताव पर इनसे बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि हम डुवार्स-तराइ के मामले में दखल नहीं देंगे। यहां के विकास का पूरा दायित्व जॉन बारला निभाएंगे। रोशन गिरि ने कहा कि जीटीए पर प्रस्ताव विधान सभा में पारित हो गया है। अब केवल राष्ट्रपति के अनुमोदन की जरूरत है। उसके बाद ही जीटीए की बैठक होगी। बाद में जीएटीए के नामकरण को लेकर बैठक होगी। जीएटीए की मूल कमेटी के उप प्रधान डुवार्स-तराइ क्षेत्र से होंगे। केंद्र सरकार द्वारा जीटीए के लिए आवंटित दो सौ करोड़ रुपए का पचास प्रतिशत इसी क्षेत्र के लिए खर्च होगा। डुवार्स-तराइ में जीटीए की शाखा खुलेगी। डा. हर्क बहादुर छेत्री ने कहा कि मोर्चा के गठन के चार साल की सबसे बड़ी उपलब्धि दोनों संगठनों का एकजुट होना है। इस एकजुटता से कोलकाता चिंतित है। कोलकाता और दिल्ली हमारे बीच फूट पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति हमारी आस्था है। भूकंप के दौरान उन्होंने जो समर्थन दिखाया उससे उम्मीद बंधती है। सुकरा मुंडा ने कहा कि नेपाली और आदिवासी समुदाय चाय बागान क्षेत्र में लंबे अरसे से वंचित हैं। इसीलिए जीएटीए का गठन जरूरी था। जॉन बारला ने कहा कि अलग अलग आंदोलन के चलते दोनों संगठन में एका हुई है। संयुक्त संगठन होने से कोलकाता और दिल्ली का सिर घुम गया है। उन्हें राजनैतिक रूप से समाप्त करने की साजिश आदिवासी समाज के भीतर से हो रही है। एटीए को लेकर अलग से कमेटी गठित होगी। यह एकता सभी समुदायों के विकास के हित को ध्यान में रखकर की गई है। किसी को कोई शिकायत हो तो उनसे संपर्क कर सकता है। इस बाबत आविप के राज्य अध्यक्ष बिरसा तिर्की ने कहा कि यह सही है कि बीते 17 अक्टूबर को दिल्ली में जॉन बारला और सुकरा मुंडा के अनुरोध पर उन्होंने भी बैठक में भाग लिया था। लेकिन उन्होंने जीएटीए के प्रस्ताव को अस्वीकार किया था। उन्होंने सवाल किया कि श्रमिक संगठन होकर सुकरा मुंडा किस हैसियत से राजनैतिक मसले को लेकर आंदोलन में शामिल होंगे ?साभारदैनिकजागरण

 

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Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

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