आदिवासियों की जमीन वापस करने के आदेश

  जगदलपुर  – आदिवासियों की भूमि विक्रय के 63 मामलों में अनुमति रद्द कर दी गई है। गैर आदिवासियों द्वारा बस्तर जिले में आदिवासियों की जमीन औने-पौने दाम पर खरीदने के मामले में शुक्रवार को संभागायुक्त ने कड़े आदेश जारी करते हुए बस्तर जिले के 63 प्रकरणों में भूमि के क्रय-विक्रय संबंधी कलेक्टर द्वारा दी गई अनुमति को निरस्त कर दिया है। साथ ही इन सभी मामलों को कलेक्टर को रिमांड करते हुए जांच के निर्देश दिए गए हैं।

अधिसूचित क्षेत्रों में शामिल होने और यहां पांचवीं अनुसूची प्रभावशील होने के बाद भी कई कलेक्टरों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बड़े पैमाने पर आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति दी है। आदिवासियों की जमीन का किसी भी तरह से गैर आदिवासियों को अंतरण प्रतिबंधित किया गया है। संभागायुक्त के न्यायालय में स्वयंमेव पुनरीक्षण के दौरान छत्तीसगढ़ शासन विरूद्ध श्रीमती सरादी पति लक्ष्मण एवं अन्य 11 के मामले में विचारण करते हुए कहा कि डेढ़ एकड़ कृषि भूमि को सुनियोजित तरीके से पहले स्वयं के आवासीय उपयोग हेतु डायवर्सन कराया गया और बाद में 16 अलग-अलग भूखंडों में विभाजित कर गैर आदिवासी को विक्रय करने की अनुमति अपर कलेक्टर जगदलपुर से प्राप्त की गई इस प्रकरण में संहिता की धारा 165 (6) (एक) का उल्लंघन स्पष्ट रूप से किया गया है। इस धारा के प्रावधान लागू होने के बाद भी आदिवासी की भूमि गैर आदिवासी को अंतरण की अनुमति धारा 165 (6) (एक) के तहत प्रदान नहीं की गई है। तीन-चार वर्ष में बहुतायत से इस तरह के प्रकरण में अंतरण की अनुमति संदेहास्पद है।
इस प्रकरण में अवैध प्लाटिंग कर जिन 16 लोगों को जमीन बेची गई उनमें मो. असलम, मो. अजहुल खान, मो. असलम खान, आशा सिंह, रीतेश सिंह राजपूत, सुनीता अग्रवाल, बलदाऊ पांडे, किशनलाल पटवा, उत्सव पांडे, सबीना रजा, डॉ. एल नागेश्वर राव, विद्याराव, सुनीता अग्रवाल, सरिता जैन, बशीरूल कादरी व पुष्पलता शामिल हैं।
आदिवासियों की जमीन बड़े पैमाने पर गैर आदिवासियों द्वारा औने-पौने में खरीदने के कई मामले सामने आए हैं। कुछ रसूखदारों पर बेनामी जमीन लेकर बड़ी कालोनियां तैयार कर बेचने का आरोप भी है। पहले चरण में जनवरी 2011 में आए 63 प्रकरण बस्तर जिले के और 10 प्रकरण दंतेवाड़ा जिले के हैं। इनकी सुनवाई 23 अगस्त 2011 से संभागायुक्त न्यायालय में की गई। 10 जनवरी को इन सभी का निराकरण कर दिया गया। अब 63 प्रकरणों में भी संभागायुक्त ने विचारण के बाद आदेश पारित कर दिया है। दिसंबर 2011 में 16 नए प्रकरण भी स्वप्रेरणा से पुनरीक्षण में लिए गए हैं। जिन पर सुनवाई का दौर जारी है।

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Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

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