दोषी अफसरों पर कार्रवाई की अनुशंसा अब करेगा आयोग

आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों के नाम पर अंतरण की अनुमति देने वाले अफसरों पर कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा आयोग करेगा। यह और भी गंभीर बात है कि ऐसे मामलों में आदिवासी अफसरों की भूमिका रही है। यह बात अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष देवलाल दुग्गा ने पत्रकारों से चर्चा करते कही।हालांकि अब तक किसी तरह की शिकायत आने से उन्होंने इंकार किया, लेकिन शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की बात उन्होंने कही।
कुछ आदिवासी नेताओं द्वारा बस्तर में छठवीं अनुसूची की मांग के संबंध में उन्होंने कहा कि फिलहाल बस्तर में इसकी आवश्यकता नहीं है। यहां पांचवीं अनुसूची प्रभावशील है। पेसा कानून भी अपना काम कर रहा है इस स्थिति में वे छठवीं अनुसूची की आवश्यकता नहीं समझते। यहां के आदिवासी अब भी अशिक्षा के चलते अपने अधिकारों से वाकिफ नहीं हैं। जिसके चलते वे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते। कांकेर में सांसद निधि के कथित दुरुपयोग की शिकायत आयोग को मिली है। इस मामले में अब तक तीन पेशी हो चुकी है। जिसमें कृषि उपज मंडी के अफसरों से पूछताछ की गई है। जल्दी ही इस पूरे मामले से पर्दा उठ जाएगा। आवश्यकता पडऩे पर सांसद से भी आयोग पूछताछ करेगा। फिलहाल वे इसमें तकनीकी खामियों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
इसी महीने 18 तारीख को प्रस्तावित आदिवासी अधिकार दिवस की तैयारियों का जायजा लेने यहां पहुंचे आयोग के अध्यक्ष दुग्गा ने कहा कि इस सम्मेलन में ग्राम पंचायत स्तर से लेकर जनपद और जिला पंचायत स्तर के पंचायत प्रतिनिधि शामिल होंगे। इनके अलावा जनजाति समाज के सभी प्रमुखों, इलाके के सिरहा-गुनिया, मांझी-चालकी व अन्य लोग शामिल होंगे।
आयोजन का उद्देश्य आदिवासियों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने शिक्षित करना है। इसमें विभागीय अफसर भी शामिल होंगे और सरकार की योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ किस तरह उठाएं इसकी जानकारी देंगे। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सहित सभी विधायक व राज्य सरकार के मंत्री शामिल होंगे।

पुलिस वालों ने रोक दिया
ताड़मेटला और मोरपल्ली में पिछले साल सैकड़ों आदिवासियों के घर जला दिए जाने के बाद भी आयोग के अब तक नहीं पहुंचने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जनजाति आयोग सूचना मिलने के तत्काल बाद ही प्रभावित गांवों में जाना चाहता था, लेकिन पुलिस वालों ने रोक दिया। अब आयोग एक बार फिर से वहां जाने की तैयारी कर रहा है।
संविधान नहीं जानते एमएलए
दुग्गा ने चर्चा के दौरान कहा कि कई एमएलए और मंत्री भी ऐसे हैं जिन्होंने आज तक भारतीय संविधान का पन्ना तक नहीं पलटा होगा। हालांकि उन्होंनें किसी एक का नाम लेने से इंकार कर दिया, लेकिन यह कहा कि संविधान के बारे में अधिकतर एमएलए जानकारी नहीं रखते यह बात ठीक नहीं है इससे कई तरह की परेशानी सामने आती है।

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Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

1 thought on “दोषी अफसरों पर कार्रवाई की अनुशंसा अब करेगा आयोग”

  1. बेचारे, बलि के बकरे। सरकार उनके लिये सर्वोच्च अधिकार देती है ताकि वे गरीबों के अधिकार की रक्षा कर सकें। लेकिन वे अपना खुद का डिसीजन लेने के बदले नेता, उद्योगपतियों और दूसरों के कठपुतली बन जाते हैं। और फिर नेता और उद्योगपति अपना काम निकल जाने के बाद नक्सलियों के जैसे एनकाउन्टर के लिये छोड़ देते हैं।
    सरकारी अफसर अपना कर्तब्य समझें और गरीबों की मदद करें।

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