अनुसूचित जनजाति बहुल इलाकों में शुद्ध पेयजल उपलब्‍ध कराने को सरकार कृतसंकल्‍प

सरकार ने कहा है कि सभी अनुसूचित जनजाति बहुल इलाकों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति योजना लागू करने के लिए वह कृ‍तसंकल्‍प है। राष्‍ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत वार्षिक बजट आवंटन का 10 फीसदी अनुसूचित जनजाति बहुल इलाकों में ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के तहत खर्च करना निर्धारित है, क्‍योंकि राज्‍यों में ग्रामीण अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की आबादी पर 10 फीसदी विशेष जोर दिया जाता है। राज्‍यों द्वारा पेयजल योजना चलाने के लिए आवासीय इलाकों के आंकड़ों में जंगल क्षेत्र के आवासीय इलाकों सहित छोटी आबादी वाले इलाकों को भी शामिल किया जा सकता है। 100 से अधिक लोगों की आबादी वाले क्षेत्र के पहले के प्रारूप में बदलाव करते हुए राष्‍ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत अब 100 या इससे कम आबादी वाले इलाकों को भी शामिल कर लिया गया है। 250 लोगों की आबादी पर एक हैंड पम्‍प देने के पहले के प्रारूप में बदलाव करते हुए राज्‍य सरकारों को अब यह छूट दी गयी है कि हैंडपम्‍प लगाने के मामले में आबादी और दूरी को लेकर फैसला वह खुद कर सके। 01-04-2012 तक के आंकडों के अनुसार देश के 16,64,186 ग्रामीण आवासों में से 3,57,727 ग्रामीण आवास अनुसूचित जनजाती बहुल हैं। इनमें से 2,53,497 आवासीय इलाकों में पूरी तरह से शुद्ध पेय जल की आपूर्ति हो रही है, 82,110 आवासीय इलाकों में आंशिक तौर पर जबकि 22,120 आवासीय इलाकों में पेय जल के एक या दो स्रोत हैं जिनमें रासायनिक मिलावट की समस्‍या है। यह जानकारी आज लोकसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री जयराम रमेश ने दी।

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Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

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