सैकड़ों युवतियां नारी तस्करों के झांसों में

चामुर्ची,: डुवार्स के चाय बागानों एवं वन बस्तियों में रहने वाली सैकड़ों युवतियां नारी तस्करों के झांसों में फं स कर जाने-अनजाने ऐसे दलदल में फंस जाती हैं जहां से लौट पाना आसान ही नहीं असंभव होता है। चामुर्ची इलाके के कठालगुड़ी, रैडबैक, चामुर्ची, फारसबस्ती इलाके से दर्जनों युवतियां दिल्ली, हरियाणा सहित अन्य शहरों में रोजगार दिलाने के लिए ले जाया जाता है जिनमें से कई युवतियों का उनके परिजनों को अभी तक कोई अता-पता नहीं है। प्रशासन एवं स्वयं सेवी संस्था नारी तस्करी रोकने की दिशा में प्रयासरत तो रहती हैं मगर नारी तस्करी रूक नहीं पा रही है। जो काफी गंभीर और चिंतनीय विषय है। चाय बागानों में आर्थिक तंगी के कारण ही अधिकतर युवतियां नारी तस्करों के चंगुल में फंसती हैं। जिले के मुजनाई, दलमोर, रहीमपुर, बंधा पानी, नांगडाला और ढेकलापाड़ा चाय बागान सहित देवपाड़ा, रायडाक, कार्तिक चाय बागानों में करीब 514 महिलाएं एवं युवतियों अन्य राज्यों में काम करने गई है। मुजनाई चाय बागान की मुगली उरॉव, एवं शर्मिला गुरुंग कई वर्षो से लापता है। वे लोग फिलहाल किस हालत में इसकी जानकारी उनके परिजनों को नहीं है। डुवार्स डे परिचालन कमेटी के अध्यक्ष डॉ. पॉथ प्रतीम ने कहा कि डुवार्स की माली हालत काफी सोचनीय है। चाय उद्योग की स्थिति भी ठीक नहीं है एवं रोजगार के संसाधन में नहीं होने से डुवार्स से अनेक युवा वर्गं अन्य राज्यों को पलायन कर रहे हैं। इस संबंध में स्थानीय प्रशासन एवं स्वयंसेवी संस्थाओं को भी ठोस कदम उठाने चाहिए। चाय बागानों एवं बस्तियों में नारी तस्करों के एजेंट लाचारी एवं गरीबी का लाभ उठाकर सीधी सादी युवतियों को बहला-फुसला कर काम दिलाने के बहाने पर अन्य राज्यों में ले जाकर देह व्यापार की मंडियों में बेच देते हैं। जहां से उन युवतियों का निकल पाना असंभव हो जाता है। चाय बागानों सहित वन बस्तियों में सौ दिवसीय रोजगार योजना सही ढंग से पालन नहीं होना भी एक कारण है। डुवार्स जागरण जैसे स्वयंसेवी संस्था भी चाय बागानों में महिला एवं बाल तस्करी रोकने के लिए कुछ कारगर कदम उठा रही हैं। संस्था से जुड़ी सरिता प्रधान का कहना है कि हमने कई बार इस संबंध में जागरूकता अभियान भी चलाया। चाय बागानों में महिला तस्करी के साथ-साथ छोटे-छोटे बालक -बालिकाओं को भी एजेंट कार्य देने के बहाने बाहर ले जा रहे हैं। इस कार्य को रोकने के लिए स्थानीय लोगों की जागरूकता होनी चाहिए। नारी तस्करी के पीछे एक गिरोह काम कर रहा है। जो एजेंटों के जरिए चाय बागानों की युवतियों को बाहरी राज्यों में काम दिलाने के लिए भेज रहा है। कई स्वयं सेवी संस्था इसे रोकने को प्रयासरत हंै। फिर भी यह कार्य डुवार्स में हो रहा है। चाय बागानों में नारी तस्करी की बढ़ोतरी से यहां सचेत वर्ग के लोग काफी चिंतित हैं।साभार-दैनिकजागरण

Advertisements

Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

1 thought on “सैकड़ों युवतियां नारी तस्करों के झांसों में”

  1. सत्यमेव जयते !!!

    दहेज: लड़कों द्वारा लड़की वालों से दहेज लेना।
    भ्रून हत्या: जिसकी जड़ या कारण दहेज है।
    दहेज और भ्रून हत्या के कारण लड़कियों की संख्या में कमी। अविवाहित लड़कों की बृद्धि।
    जो दहेज लेते थे वे अब लड़कियाँ खरीद रहे हैं। नारी तस्करी की बृद्धि। पर आदिवासी ही क्यों?
    गरीबी: शिक्षा, जागृति, एकता की कमी।
    नारी तस्करी रोकने के लिये दलालों का पता लगाया जाय, उन पर नजर रखी जाय, उनका पर्दाफास हो और कड़ी सजा दी जाय। उनको पकड़ने वालों को इनाम दिया जाये। पर झूठे आरोप से बचाया जाय। ताकी कोई भी किसी पर झूठा आरोप ना लगा सके।
    अमीर खान की जादू की छड़ी घुमाईये। हमारी लड़कियों को बचाना आप सभों का काम है।

I am thankful to you for posting your valuable comments.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s