धर्मांतरण का करेंगे पुरजोर विरोध

कांकेर-अखिल भारतीय गोंडवाना गोंड़ महासभा के नवम राष्ट्रीय अधिवेशन 22 प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। तीन दिनों तक चले अधिवेशन की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष शिशुपाल शोरी ने की जिसमें समाज के साहित्यकार, चिंतक, दार्शनिक, धार्मिक गुरू, गोंडी धर्म के धर्माचार्य, राजनैतिक नेता, कार्यकर्ताओं ने समाज के सांस्कृतिक, शैक्षणिक, धार्मिक, बौध्दिक, आर्थिक एवं राजनीतिक हितों की रक्षा के संबंध में चिंतन मनन किया। इसके अलावा तय किया गया की आगामी राष्ट्रीय अधिवेशन नागपुर ((महाराष्ट्र)) में आयोजित किया जाएगा।
पारित प्रस्ताव हैं गैर गोंडी धर्म के प्रचारक गोंडी बाहुल्य क्षेत्र में अपने धर्म का प्रचार करते हैं एवं गोंडी धर्म संस्कृति को अंधविश्वास व रूढ़ीवादी कहकर भ्रामक प्रचार करते हैं। इससे समाज में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। गोंड़ समाज के बीच में गैर गोड़ी धर्म के प्रचार पर तत्काल रोक लगाई जाए एवं धर्मांतरण का पुरजोर विरोध किया जाएगा। भावी पीढ़ी के समग्र विकास हेतु विकासखंड, जिला, प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर उ\’च शिक्षण संस्थान विद्यालय, महाविद्यालय एवं गोंडवाना विश्वविद्यालय की स्थापना करते समाज के युवक युवतियों को शिक्षण के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराया जाएगा। गोंड़ जन समुदाय में सामाजिक एवं राजनैतिक चेतना का अभाव है। सक्षम सामाजिक एवं राजनैतिक नेतृत्व क्षमता के विकास हेतु गोंड़ महासभा पंचायत, विकासखंड, जिला एवं रा\’य स्तर पर प्रतिभा संपन्न युवक युवतियों का चयन कर सामाजिक, धार्मिक एवं राजनैतिक नेतृत्व विकास हेतु कार्यशाला आयोजित करेगी। प्रशासनिक सेवा में गोंड़ जनसमुदाय की स्थिति नगण्य है। उपरोक्त परीक्षाओं के लिए गोंड़ महासभा उ\’च स्तरीय कोचिंग क्लास संचालित करेगी। वर्तमान भारत के विभिन्न भू भागों में गोंडवाना कालीन ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के धरोहर गढ़ किला, देव देवालय, गढिय़ा, मढिय़ा आस्था केन्द्र बिखरे पड़े हैं जिसकी
सुरक्षा करना तो दूर निरंतर अतिक्रमण किया जा रहा है. गोंडी धर्मावलंबियों के आस्था केंद्रों को कब्जे से मुक्त कराया जाएगा।
भारतीय संविधान में उल्लेखित पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में पेसा कानून का शत प्रतिशत पालन किया जाए एवं इसके समीक्षा बैठकों में गोंड़ समाज के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाए। अब तक महासभा के अधिवेशनों में पारित प्रस्ताव को महासभा ने पुन: अंगीकार किया। गोंड़ समाज के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के की मूर्तियां चौक चौराहों में स्थापित कराई जाएगी। अधिसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के भूमि का गैर आदिवासियों के पक्ष में किसी भी प्रकार के अंतरण पर रोक है किंतु गैर आदिवासी, आदिवासी युवतियों से प्रलोभन एवं झूठे झांसे देकर विवाह/रखैल बनाकर आदिवासियों के भूमि का क्रय/विक्रय करते हैं। विजातीय विवाह करने वाले गोंड़ युवतियों को आदिवासियों को मिलने वाले संवैधानिक लाभों से वंचित करने की मांग की गई। उत्तरप्रदेश में केवल 13 जिलों में ही गोंड़ एवं धुरिया जाति को अनुसूचित जनजाति में सूचीबद्घ किया गया है। वहां के शेष सभी जिलों में निवासरत गोंड़ एवं धुरिया जाति को अनुसूचित जनजाति अधिसूचित किया जाए एवं जनसंख्या के अनुपात में विधान सभा सीट आरक्षित की जाए। देश जिस गति से औद्योगीकरण की ओर बढ़ रहा है उतनी ही तेजी से गोंड़ समुदाय के साथ अन्याय भी हो रहा हैं। गोंड़ महासभा औद्योगीकरण के खिलाफ नहीं है लेकिन औद्योगीकरण के नाम पर गोंड़ समाज के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अधिसूचित क्षेत्रों में बाहरी व्यक्तियों के लिए वोट देने का अधिकार 50 वर्षों से निवासरत को ही दिया जाए। नक्सली उन्मूलन के नाम से कहां-कहां स्थान आबंटित किया गया है जांच करवाई जाए। 170 ख के प्रकरणों के शीध्र निपटारा हेतु प्रभावशील कदम उठाया जाए। महासभा के विस्तार के लिए यह संकल्प पारित किया गया कि गोंड़ बाहुल्य सभी रा\’यों में महासभा का विधिवत गठन कर स्थाई कार्यालय एवं राष्ट्रीय स्तर पर नागपुर एवं दिल्ली में कार्यालय खोला जाए। गोंड़ समाज के संस्कृति की रक्षा के लिए अधिसूचित क्षेत्रों में किसी भी योजना के लिए जमीन अधिग्रहण पर तत्काल रोक लगाई जाए। पूरे देश में समरसता हेतु अंतरजातीय वैवाहिक संबंधों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया। गोंडी धर्म के प्रचारकों की नियुक्ति कर सभी प्रदेशों में व्यापक प्रचार किया जाए। संवैधानिक अधिकारों के लिए पूरे देश के गोंड़ एक जुट होकर संघर्ष करेंगे। असम में गोंड़ जाति को अनुसूचित जनजाति की सूची में सम्मिलित किया जाए। वर्तमान कार्यकारिणी के कार्यकाल की वृध्दि आगामी तीन वर्षों के लिए की जाए। साभार;भास्कर न्यूज

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Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

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