हास्टल में पुरुष कर्मचारी

बुंदेली के आदिवासी कन्या छात्रावास में दिए गए तकिए और गद्दे फट गए हैं।काफी दिनों तक चादर की धुलाई नहीं होती वहीं चूल्हे में लकड़ी जलने से उठेधुएं से लड़कियां परेशान।
लापरवाही – झलियामारी और नारायणपुर की घटना से भी नहीं ले रहे आश्रमों में सबक

झलियामारीव नारायणपुर के आश्रमों में मासूम बालिकाओं के साथ घटित घटनाओं के बाद भीप्रशासन आंख मूंदकर बैठी है और आज भी शासन के स्पष्ट निर्देशों के बाद भीकन्या आश्रमों में पुरुष कर्मचारी कार्यरत है। जिससे छात्रावास व आश्रमोंमें पढ़ रहे बच्चे आज भी असुरक्षित है।

पिथौरा व्लाक में कुल 10 बालिका छात्रावास व आश्रम संचालित हैं जिसमें 4 कन्या आश्रम, 5 प्रीमेट्रिक व 1 पोस्ट मेट्रिक है। उक्त सभी जगहों पर पुरूष कर्मचारी जलवाहक वरसोईया के रूप में कार्यरत है। इसमें से कई जगहों पर उक्त कर्मचारीछात्रावास परिसर में निवासरत है जो कि सुरक्षागत दृष्टिकोण व शासन केनिर्देशानुसार गलत है। झलियामारी के बाद हाल ही में नारायणपुर में आश्रम कीबालिकाओं पर हुए जुल्म के बाद भी आज भी प्रशासनिक व्यवस्था वही ढर्रे परचल रही है और यहां पदस्थ पुरुष कर्मचारियों को हटाया नहीं गया है। व्लाक केसभी 10 आश्रमों में चौकीदार के रूप में एक महिला कर्मचारी व एक महिलाहोमगार्ड पदस्थ है।

बुंदेली के 50 सीटर कन्या छात्रावास में मात्र 22 बच्चे ही मिले वहां निवासरत बच्चों ने बताया कि अधीक्षिका शिरीन कंवररोज शाम को आती है तथा थोड़ी बाद वापस चली जाती है। यही बात वहां पदस्थहोमगार्ड जया दीवान व चौकीदार ताराबाई ध्रुव ने भी बताई। यहां मीनू केअनुसार बच्चों को भोजन भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है तथा कभी-कभी आचार पापड़नसीब होता है सुबह सत्र में दाल बनता ही नहीं है। सोमवार को बच्चों कोआलू, सोयाबीन की बड़ी व बैंगन की मिक्स सब्जी खिलाई गई। नाश्ता में मुर्रादेना बताया गया।

खाना पकाने के लिए यहां चूल्हा व लकड़ी का उपयोगकिया जाता है जिससे छात्रावास परिसर में धुंआ भर जाता है जिससे बच्चों कोपरेशानी का सामना करना पड़ता है। पूछने पर पता चला कि एक भी गैस सिलेंडरनहीं है। यही हाल गद्दे, तकिए व बेडशीट पर भी देखने को मिला फटे हुए तकिए वबेडशीट बच्चों के बिस्तर पर मिले। यहां आज भी बच्चों से बेडशीट व कपड़ेअधीक्षिका धुलवा रहें है। जबकि शासन के निर्देशानुसार बच्चों से सफाई नहींकरवाई जानी है।

इस छात्रावास में पदस्थ जलवाहक सुरेंद्र मन्नाडेछात्रावास परिसर में महिला चौकीदार के लिए बने कक्ष में निवास करता है। जोकि सुरक्षा के लिहाज से अनुचित है इसी तरह रसोईया भी पुरूष ही है जो किरात्रि में भोजन कराने के बाद वापस घर चला जाता है। अधीक्षिका को छात्रावासकोई विशेष सरोकार नहीं है दिन में एकात घंटे के लिए आती है और चली जाती हैजबकि उन्हें वहां 24 घंटे रहना चाहिए। अभी तक पुरूष कर्मचारी आज भी पदस्थहै।

सीईओ ((ट्राइबल)) कमलनारायण नाग ने बताया कि कन्या हास्टल मेंपुरूष कर्मचारी कार्यरत है बुंदेली छात्रावास परिसर में निवासरत कर्मचारीको अतिशीघ्र मकान खाली करने कहा गया है।

Advertisements

Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

I am thankful to you for posting your valuable comments.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s