2021 तक सबको हिंदू बना देंगे-धर्म जागरण समिति

नेह इंदवार

CAA, NRC और NPR मोदी सरकार का देश के लिए बनाए गए विकास कार्यक्रम नहीं है। बल्कि यह विशुद्ध राष्टीय स्वयं सेवक संघ का एजेंडा है। मोदी सरकार तो उसे बस जी-जान से लागू करने की कोशिश कर रही है।

इसी एजेंडे को लागू करने के लिए लोकसभा चुनाव में ईवीएम का जबरदस्त खेल किया गया। ईवीएम के खेल में देश के कुछ चुनिंदा पूँजीपतियों का सक्रिय सहयोग था, जिसके फलस्वरूप उन्हें देश के अधिकतर संसाधनों पर कब्जा दिलाने का काम खूब जोरशोर से किया जा रहा है।

CAA, NRC और NPR की पृष्टभूमि को समझने के लिए नीचे शेयर किए गए “आजतक” के वीडियो को ध्यान से देखें। हो सके तो उसे डाउनलोड कर लें, क्योंकि उसे डीलिट किया जा सकता है।

2014 में ही धर्म जागरण समिति ने धर्मांतरण के मुद्दे को तूल देते हुए कहा था कि ’21 दिसंबर 2021 तक देश के सभी मुसलमानों और ईसाइयों को हिंदू बना दिया जाएगा. यही नहीं, राजेश्वर सिंह ने यह भी कहा था कि मुसलमानों और ईसाइयों को देश में रहने का हक भी नहीं है और 2021 तक इन्हें देश से निकाल दिया जाएगा। राजेश्वर सिंह किनकी ओर से बयान जारी कर रहा था ? उनके बयान के पीछे कौन से तत्व काम कर रहे थे ?

बकौल (aajtak.in [Edited By: महुआ बोस]
नई दिल्ली, 18 दिसंबर 2014, अपडेटेड 13:43 IST) लिंक https://aajtak.intoday.in/…/will-finish-christianity-and-is…
2014 के अगस्त में धर्म जागरण समिति और बजरंग दल ने मिल कर अलीगढ़ में 72 लोगों को ईसाई से और 8 दिसंबर 2014 को आगरा में 200 मुसलमानों की हिंदू धर्म में वापसी कराई थी। खबरों में इन संगठनों को आरएसएस का अनुषंगी बताया गया है।

इसका मतलब है कि CAA, NRC और NPR जैसे कार्यक्रमों का खाका बहुत दिनों से बनाई जा रही थी। इस पर काफी माथा-पच्ची की गई है। विशेषज्ञों की सहायता ली गई है। मतलब षड़यंत्र में सैकड़ों लोग शामिल है। ऐसे तमाम षड़यंत्रों का एक पहलू आर्थिक लाभ या लूट और अपनी जमींदारी स्थापना करना जरूर होता है। ऐसा लगता है वर्तमान लोकसभा कार्यकाल को इसके लिए अंतिम समयसीमा निर्धारित किया गया है। इसके लिए खरबपतियों से सहायता मांगी गई और ईवीएम के रास्ते इस लक्ष्य तक की दूरी की यात्रा निष्कंटक पूरी की गई। इसका मतलब यह है कि जैसे-जैसे CAA, NRC और NPR के कार्य या अफरा तफरी को बढ़ाया जाएगा, सरकारी और राष्ट्रीय संपदा की लूट भी बढ़ती जाएगी, और लक्षित हिंदू राष्ट्र में अघोषित रूप से देश के एक दर्जन पूँजीपति देश के मालिक भी बन जाएँगे। कोई एनर्जी सेक्टर पर कब्जा कर लेगा, कोई उत्पादन और वितरण पर तो कोई रक्षा और वैज्ञानिक विकास के तामझाम पर। सरकारी उद्यमशीलता और PSUs को खत्म कर दिया जाएगा और राष्ट्रीय एकाधिकार की ऐसी व्यवस्था तैयार कर ली जाएगी, कि कोई व्यक्ति तो क्या, कोई भी संगठन या आंदोलन इन व्यवस्थाओं को चुनौती नहीं दे सकेगा।

मतलब विराट हिंदू जनसंख्या दर्जन भर पूँजीपतियों के द्वारा परोक्ष रूप से शासित होगा। देश में सामंतवाद, राजा-राजवाड़े के राज फिर से फूनगियों में उग जाएगी और हिंदू जनता मंदिरों में भजन गाएगी या इन पूँजीपतियों के रहमो-करम पर जिंदगी जीएगी। पूँजीपतियों की लूट में आम जनता रोड़ा न बनें इसके लिए फिलहाल उन्हें हिन्दुत्व का लालीपोप चूसने के लिए दिया गया है। CAA, NRC और NPR के सपोर्ट में आकर जनता लालीपोप चूसती हुई दीख भी रही है।

गैर हिन्दू को हिंदू बनाने के लिए नागरिकता का मुद्दा एक तलवार है। वर्तमान आधुनिक राजनैतिक व्यवस्था में पूरे विश्व में कोई भी व्यक्ति जानवरों की तरह नागरिकविहीन मनुष्य नहीं हो सकता है। इस अति अनिवार्य नागरिकता के मुद्दे को ही धर्म की पोंगापंथी लक्ष्य को पूरा करने के लिए हथियार बनाया गया है। यह अत्यंत सोची-समझी चाल है। जाहिर है कि यह खतरनाक स्तर की बदमाशी, निकृष्टता, बेवकूफी और मानव विरोधी सोच पर आधारित है। इस विचारधारा में मेरा धर्म और संस्कृति ही श्रेष्ठ है जैसी झूठी अवधारणा गुंफित है। जबकि वास्तविकता तो यह है कि धर्म संस्कृति और उससे जुड़े विचार कभी एक से नहीं रहते हैं और उसमें निरंतर परिमर्जन की प्रक्रिया चलती रहती है। लेकिन साम्प्रदायिक सोच से नहाए लोगों को सिर्फ अपनी संकुचित सोच के वर्चस्व को बनाए रखने की धुन रहती है। चाहे इसके लिए कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।

तीन दिन पहले आई ग्लोबल लोकतंत्र सूचकांक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में नागरिकों की आजादी की स्थिति एक साल में कम हुई है। लोकतांत्रिक सूची में यह गिरावट देश में नागरिक स्वतंत्रता के ह्रास के कारण आई है। सूची में चीन 153वें स्थान पर है। नार्वे शीर्ष पर व उत्तर कोरिया सबसे नीचे है। सूचकांक सरकार का कामकाज, चुनाव प्रक्रिया व बहुलतावाद, राजनीतिक भागीदारी, राजनीतिक संस्कृति और नागरिक स्वतंत्रता पर आधारित है।

यह रिपोर्ट बहुत कुछ कहता है। भारत बहुलतावादी देश है और लोकतंत्र और आजादी भारत की रीढ़ की हड्डी है। रीढ़ के कमजोर होने का मतलब आजादी और लोकतांत्रिक मूल्यों को धारण करने वाली सरकार, मीडिया, संसदीय परंपरा, न्याय प्रणालियों का कमजोर होना है। ये सूचकांक बहुत खराब स्थिति को इंगित करता है। मतलब यही है कि देश कुछ लोगों की धार्मिक पोंगापंथी की जिद्द से चरमरा रहा है और यही हाल रहा तो एक दिन भरभरा कर गिर जाएगा। तब स्थिति अफ्रीका और मिडिल इस्ट की किसी देश के जैसे हो जाएगा, और विश्व की तीसरी आर्थिक और मिलिटरी शक्ति होने के ख्वाब हवा में विलीन हो जाएँगे।

भारत में चल रहे वर्तमान संघर्ष के केन्द्रीय भाग में, मूल रूप में आस्तिकों के मध्य धर्म और संस्कृति का संघर्ष है। एक आस्तिक विचारधारा दूसरे आस्तिक विचारधारा को अपना दुश्मन समझता है और उसे कमजोर करने, वजूद से मिटा देने के लिए रास्ते तलाशता रहता है। आस्तिकों की इस लड़ाई में आध्यत्मिकता बिल्कुल नहीं है। धर्म और पोंगापंथी के इन रणनीतिक और संघर्ष में धार्मिक कट्टरपन ही एक दूसरे को लड़ाई के लिए उकसाता है। इस संघर्ष और दुश्मनी को विज्ञान और पॉपुलर कल्चर के विचारधारा से नष्ट किया जा सकता है। लेकिन ऐसी सोच देश में कितने के पास है ?

आस्तिकों (बिल्लियों) की लड़ाई में पूँजीपति (बंदर) अदूरदर्शी नेताओं, बाबुओं के सहारे पूरे देश के संसाधन, लोकतंत्र, आजादी, मानवीय और नागरिक अधिकारों को खा जाएँगे और फिर बिल्लीयों का झूँड़ अत्यंत शक्तिशाली बने बंदरों को निरीह आँखों से ताकने के सिवाय कुछ नहीं कर पाएँगे।

https://aajtak.intoday.in/video/i-will-make-everyone-hindu-says-rajeshwar-singh-1-792031.html?fbclid=IwAR1l0bNDQrIJHXR2gAp5GtWpLZKY_McNGAUlUKEfG0p_RccGkfJCAyRmgaU

Author: madhubaganiar

Madhubaganiar loves to write on social issues especially for downtrodden segment of Indian society.

I am thankful to you for posting your valuable comments.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.